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                श्श्श...कोई है औरया बस स्टैंड...
Horror story.
सीमा खन्ना


उसे वहाँ खड़े हुये आधे घंटे से ऊपर हो गया था।अभी तक कोई बस नहीं आई थी।टैक्सी वाला उसे मना भी कर रहा था ।ये दिसंबर की सर्दीली रात थी। उसने ओवर कोट की जेब में हाथ डाल रखें थे लेकिन गर्म नहीं थे।वैसे भी उसके हाथ -पैर ठन्डे ही रहते हैं।
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पिछले दो दिनों से पानी बरसने के कारण हवा में जबरदस्त ठंडक थी।अभी रात के नो ही बजे थे लेकिन रात साय साय कर रही थी। कुछ दूरी पर चाय की एक स्टॉल थी। चाय वाले को मिला कर कोई चार आदमी होंगे जो चाय की भट्टी के पास आग ताप रहे थे।एक तो उनमें से बच्चा ही था जो फ़टी सी स्वेटर  पहनें बिलकुल भट्टी से  सटा हुआ खड़ा था।
अब उसे चाय की तलब महसूस हो रही थी।पैरों की ठंडक टांगो को ज़माने लगी थी। वो अपना बैग उठा कर स्टॉल की तरफ बढ़ गई।स्टॉल के सामने पहुँची तो चारों ने एक साथ उसकी तरफ देखा।
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हल्का सा डर बुलबुले की तरह उसके अंदर उठने लगा। वो मन ही मन खुद को कोसने लगी आज ही घर लौटने का फैसला उसने क्यों लिया। वो   पेपर देने आई थी इस शहर में और अब उसे अपने घर लौटना था।
उसे मिला कर इन पांचों के अलावा पूरी काली सड़क पर कोई और नज़र नहीं आ रहा था।कभी कभार कोई इक्का -दुक्का मोटर कार सर्राटे के साथ निकल जाती थी।
वो चाय की भट्टी के पास पहुँच गई।
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"एक चाय मिलेगी।" उसने डर को छुपाते हुए सपाट लहज़े में कहा।
"हा मिलेगी..अंदर आ जाओ ..थोड़ा सेक लो।"
चाय वाले ने कहा। और केतली से चाय कांच के गिलास में डाल कर उसके आगे कर दी।उसने चाय पहले से बना कर रखी थी।वो चाय का गिलास पकड़ के थोड़ा अंदर भट्टी के पास आ गई  चारों ने थोड़ा थोड़ा सरक के उसे खड़े होने की जगह दी।
चाय का सिप भर के उसे थोड़ी राहत महसूस हुई।उसने गिलास को अपने ग्लब्स पहने दोनों हाथो से जकड़ लिया।भट्टी में कोयले धीरे धीरे सुलग रहे थे।
" ये बस कब आएगी ..काफी देर से इंतजार कर रही हूँ मैं " उसने चाय सिप करते हुए पूछा।
" अब नहीं आएगी " उनमे से एक ने  ठन्डे लहज़े में कहा।
" क्या..क्यों..." उसे चाय हलक में फसी हुई महसूस हुई।
"आगे पहाड़ टूट कर सड़क पर गिर गया हैं रास्ता जाम हैं। और रात को वैसे भी कोई बस नहीं जाती।" अबके चाय वाले ने कहा।
उसे चाय वाला थोड़ा ठीक आदमी लगा।
"तुम्हें  कहाँ जाना है ?" उन चारो में से लम्बे कद वाले ने पूछा।
"ओरैया.. बस आगे से मेरा भाई भी मिलने वाला हैं.." उसने भाई की बात अपनी मर्जी से जोड़ दी। कभी -कभी हम शब्दो से भी अपनी सुरक्षा करते हैं।
" मैं सारी रात यहाँ कैसे गुजारुगी.."उसने चाय का गिलास खाली कर दिया।
" यहाँ बैठ जाओ.." चाय वाले ने उसे एक स्टूल दे दिया। वो बैठना नाहई चाहती थी लेकिन थकी हुई थी।सो बैठ कर बैठ गई। वो अभी बैठी ही थी कि अपनी जगह उसने एक लड़के को खड़े देखा। वो चोंक गई अभी तो दूर दूर तक कोई नहीं था।
"औरैया के लिए बस कब मिलेगी ?" उस लड़के ने पूछा। 
औरैया सुनते ही वो उठ खड़ी हुई।
" मुझे भी वहीँ जाना हैं,लेकिन ये कहते हैं अभी कोई बस नहीं जायेगी। "
" लेकिन उस लड़के ने जैसे कुछ सुना ही नही। "
उसने जेब से सिगरेट निकाल कर भट्टी से जलाई और मुँह से लगाने ही वाला था क़ि अचानक से उसके पीछे एक लड़की आ गई और उसने सिगरेट छीन कर फेंक दी। लड़का चिढ़ गया। वो कुछ कहता तबी बस की सीटी की आवाज आई दोनी उस तरफ भागे उन्हें भागता देख आनन फानन में लड़की भी अपना बेग उठा कर बस की तरफ भागी।
" अरे रुको,वापिस आओ.."उसने पीछे से चाय वाले की आवाज सुनी।लेकिन वो रुकी नहीं और लपक कर बस  में सवार हो गई। बस में उस लड़के और उसकी फ्रेंड के अलावा और कोई नहीं था।वो उनकी साइड वाली सीट पर खिड़की के पास बैठ गई।तभी लड़की की नज़र पीछे गई तो चाय की दुकान पर दीखे दोनों आदमी और बच्चा सीट पर बैठे हुए थे।वो चौक गई। उन्हें बस में चड़ते उसने नहीं देखा था।
लड़की ने अपना ध्यान उधर से हटा कर लड़के और उसकी फ्रेंड पर लगा दिया। कुछ विचित्र लगा उसे।बस के शीशो पर इतनी धुंद थी क़ि बाहर का कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था। 
तभी बस झटके के साथ रुकी,बस का दरवाजा खुला और उस लड़की ने देखा उसका भाई बस में चढ़ रहा हैं।उसका चेहरा ख़ुशी से खिल उठा वो जोर से चीखीं ..
" भाई..मैं यहाँ हूँ । "
भाई उसके बगल में आ कर बैठ गया वो अपने भाई को पकड़ कर रोने लगी। कुछ पल बाद उसे चेतना आई।उसने अपने भाई की तरफ देखा जो बिल्कुल पथ्थर बन कर बैठा था।
" भाई तुम यहाँ कैसे आ गए।"
" तुमने ही तो कहा था..पीछे से आवाज आई।वो झटके से घूमी तो चींख उठी।तीन भयानक चेहरे उसके सामने थे।
" भाईss.. भाई वो चीखीं लेकिन भाई की जगह एक दूसरा खून से लत-पथ चेहरा  जो दम्म से उस पर लुढ़क गया। डर की अधिकता से वो बेतहाशा चीखीं।
बचाओ...बचाओ,वि लड़का अब भी अपनी फ्रेंड के साथ बातो में व्यस्त था।लड़की को हैरानी हुई।
" ओ भई तुम्हे दिख नहीं रहा..गाड़ी रोकोSSS ... " वो अपनी पूरी ताकत से चीखीं।
" गाड़ी नहीं रुकेगी.." लड़के ने उसकी तरफ देखे बिना कहा।
"क्यों क..क्यों नहीं रुकेगी ?" वो जोर जोर से रो रही थी।
" क्योकि ड्राइवर पीछे बैठा है।" बस में बैठे सभी भयानक चेहरों ने एक साथ पीछे की तरफ इशारा किया।उसने देखा पीछे की तरफ एक और लाश पड़ी हुई थी। वो और जोर से चीख़ी..उसके चीखते ही जोर का धमाका हुआ और बस फट गई।तेज़ रौशनी चारो तरफ फैल गई।माहौल में भयानक चीखें गूंजने लगी।उसके पैरों के नीचे ज़मीन नहीं थी। वो कई फुट हवा में थी।
" मैडम.. मैडम.." झट से उसकी आँख खुली।टैक्सी ड्राइवर उसे आवाज मार रहा था। वो पागलो की तरह उसे घूरने लगी।
" मैडम ,औरया बस स्टैंड आ गया। "
उसने टैक्सी के शीशे से बाहर देखा ..काली धुंद में वो चाय की दुकान और चार आदमी उसे पीली धुंदली रौशनी में साफ नज़र आ रहे थे। उसकी रागो में जैसे कुछ जमने लगा।
" वापिस चलो..वापिस चलो.." बमुश्किल वो फ़टी फ़टी आवाज में बोल पाई।ड्रावर ने तुरंत गाड़ी घुमा ली।
" मैं आपको कहने ही वाला था,यहाँ इस वक़्त कोई नहीं आता।"
 उसने पीछे मुड़ कर देखा तीन जोड़ी डरावनी आँखे उसे ही घूर रही थी।चायवाला चाय बनाने में व्यस्त था।उसने डर कर गर्दन घुमा ली।धुंद ज्यादा बड़ गई थी।
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