6 kids bedtime stories.fairytale fables.hindi kahani.hindikahaniblog.com

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Fables/ दंतकथाएँ

Kids short stories.
Fables/दंतकथा मुख्यतः वो छोटी-छोटी कहानिया /stories होती हैं जिनमें पशु-पक्षियों के चित्ररो के माध्यम से कहानी/story को कहा जाता है और जानवर आपस में बोलते भी हैं।कहानी/story के अंत में कोई न कोई शिक्षा भी होती है।
बच्चे बहुत प्यारे होते हैं।उनकी stories में परियो और पशु-पक्षियों का बोलना वाजिब भी है। fables / दंतकथा की इस
श्रृंखला में हम 7 stories पेश कर रहे हैं।I hope आपको पसंद आएगी।कहानियो को share भी करें क्या पता किसके चेहरे पर आपकी वज़ह से मुस्कराहट आ जाये।
Read story Fairytale Thumbelina .

चींटी और टिड्डा.

Grasshopper and Ant


एक प्यारी से चींटी थी। और एक था टिड्डा यानी grasshopper।दोनों में बड़ी दोस्ती थी।लेकिन जहा चींटी मेहनत करने वाली थी वाही टिड्डा मस्तमौला था।उसे किसी काम को कोई ख्याल ही नहीं रहता था।
Fables/ दंतकथा
टिड्डा हर वक़्त इधर उधर घूमने में अपना वक़्त गुजरता था। बारिशों का मौसम आने वाला था।चींटी खाना इकट्ठा करने लगी।वो छोटे छोटे मकई के दानों को अपनी पीठ पर लाद कर अपने घर में भरने लगी।
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टिड्डे ने कहा। "क्यों इतनी म्हणत करती हो..आओ कुछ देर घूम कर आते हैं।"
चींटी ने कहा " नहीं दोस्त बारिश आने वाली हैं।मुझे अनाज जमा करना हैं।"
'अरे छोड़ो भी,अभी कहा7बारिश आने वाली है।"
लेकिन चींटी ने नहीं सुना और अपने काम में लगी रही।
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फिर क्या था। बारिश शुरू हो गई।चारो तरफ पानी ही पानी भर गया।टिड्डे ने तो अपना सारा वक़्त मौजमस्ती में ही बिताया था इसलिये उसके पास खाने को कुछ नहीं था।

लेकिन दूसरी तरफ चींटी का घर मीठे मकई के दानो से भरा हुआ था।चींटी ने कुछ मई के डेन टिड्डे को भी खाने को दिए।
इस तरह बारिश का मौसम बीत गया।
शिक्षा - समय रहते अपना काम पूरा कर लेना चाहिए।

शेर और चूहा 

Lion and Rat 


एक जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन शेर झाड़ियों के पीछे लेटा हुआ बड़ी मीठी नींद सो रहा था। तभी एक नटखट चूहा जंगल में घूमता घूमता आया और शेर के ऊपर चढ़ गया।चूहे ने समझ ये कोई टीला हैं ।चूहे को शेर का रोये दार पेट बड़ा गुदगुदा लगा और वो उस पर मस्ती के साथ उछल कूद मचाने लगा।
शेर की नींद खुल गई।उसने अपने बड़े से सिर को घुमा कर देखा।तो हैरान रह गया एक नन्हा सा चूहा उसके पेट पर कूद रहा हैं।चूहा भी शेर की बड़ी बड़ी आँखे देख कर दांग रह गया कि ये अचानक टीले की आँखे कैसे उग आई।
शेर ने झपट कर चूहे को अपने पंजो में दबा लिया।
" ये क्या गुस्ताख़ी हैं शेर ने ग़रज़ कर कहा। "
 चूहा डर के मारे काँपने लगा। फिर भी उसने हिम्मत कर के कहा।
"हे जंगल के राजा.. मुझे माफ़ कर दो..मुझसे गल्ती हो गई.."
" गल्ती कैसे हो गई..मुझ पर कूद रहे हो...आज मै तुम्हें खा जाऊँगा।" शेर गरजा।
" नहीं नहीं राजा जी..आज आप मुझे छोड़ दो एक न एक दिन मै आपके काम जरूर आऊँगा.।" चूहे ने कहा टी शेर जोर से हँसने लगा।
" तुम इतने नन्हे से मेरे क्या काम आओगे ?" शेर ने कहा और फिर मुस्करा कर उसे छोड़ दिया।
चूहे की जान में जान आई और वो सर पर पाँव रख कर भाग खड़ा हुआ।
इस वाकया को कई दिन बीत गए। फिर एक दिन शेर जंगल में घूमने निकला। एक शिकारी ने वहाँ जाल बिछा रखा था।शेर उस जाल में फंस गया। शेर ने बहुत कोशिश करी जाल से निकलने की लेकिन नहीं निकल पाया।अब शेर भी डर गया और मदत के लिये दहाड़ने लगा। kids short stories.
चूहे ने दूर से ही शेर के दहाड़ने की आवाज़ सुनी। आकर देखा तो ये क्या शेर तो जाल में फसा हुआ हैं। चूहे ने अपने तेज़ दाँतो से जाल को काट दिया।शेर आजाद हो गया।
शेर बहुत खुश हुआ उसने हँसते हुये कहा -" मै समझ गया।"
" क्या महाराज " चूहे ने पूछा।
शिक्षा-यही क़ि छोटी से छोटी चीज़ भी कभी न कभी आपके काम आ सकती हैं।

अंगूर खट्टे हैं

Angur  khatte hai.


एक जंगल में एक लोमड़ी रहती थी।वो खुद को बहुत चतुर चलाक समझती थी।एक दिन वो जंगल में घूमने निकली।घूमते घूमते वो एक सुन्दर से बग़ीचे में पहुँची।
बग़ीचे में बहुत सारे पेड़ पौधे थे। ठंडी ठंडी हवा में फल और फूलो की सुगन्ध फैली हुई थी।
लोमड़ी ने देखा एक जगह ऊँचे पेड़ो के सहारे अंगूरों की बेले फ़ैली हुई हैं।बेलो से अंगूर के गुच्छे लटक रहे थे।अंगूर रस के भरे हुए बड़े रसीले लग रहे थे।
लोमड़ी ने बहुत कोशिश करी क़ि अंगूर के गुछो तक पहुँच पाये। लेकिन वो हर बार असफल हो जाती थी।लोमड़ी कभी बेलो के पीछे जाती कभी आगे आती।ऊँचा ऊँचा उछलने की कोशिश करती लेकिन सब बेकार।
जब अंगूर पाने की सारी कोशिशें नक्अऍम हो गई तब लोमड़ी ने अपनी नाक ऊची करी।गर्दन इधर उधर उठा कर कुछ सूंघने की कोशिश करी और बोली-" अंगूर खट्टे हैं।"
ये कह कर लोमड़ी दूसरी दिशा में चल दी।
शिक्षा - जो चीज़ हमें नहीं मिलती हम उसमें कमियां निकालने लगते हैं।हमें कोशिश करते रहना चाहिए । 

कछुआ और खरगोश.

Kachhua aor khargosh.

कछुये और खरगोश की कहानी हम बचपन से सुनते आ रहे हैं।लेकिन आज भी ये कहानी हमें नई लागती हैं।ये जितनी प्रासंगिक सालो पहले थी उतनी ही आज भी हैं। तो चलिये कहानी शुरू करते हैं।
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एक कछुआ था और एक खरगोश था।दोनों अच्छे दोस्त थे।एक दिन दोनों में एक शर्त लगी। क़ि दोनों में से तेज़ कौन भाग सकता हैं।ज़ाहिर हैं सभी कहेगें खरगोश।भला कछुये की और खरगोश की भी कोई रेस में तुलना हो सकती हैं।
फिर भी दोनों की रेस होनी तै हो गई।खरगोश बोला " मैं तुमहे चुटकियों में हर दूँगा। "
कछुये ने कहा "देखते हैं "
तै समय पर दोंनो की रेस शुरू हो गई।खरगोश तो ये जा और वो जा लेकिन कछुआ बेचारा बहुत धीरे धीरे आगे बड़ रहा था।खरगोश ने पीछे मुड़ कर देखा उसे कछुआ कही नज़र नहीं आया तो उसने सोचा क्यों न थोड़ा आराम कर लिया जाये।कछुआ तो अभी दूर दूर तक नज़र नहीं आ रहा हैं। ये सोच कर खरगोश एक पेड़ के नीचे लेट कर सुस्ताने लगा।बस फिर क्या था।उसे नींद आ गई।
उधर कछुआ बिना रुके चलता रहा- चलता रहा और...जब खरगोश की नींद खुली तो उसने फिर कछुये को देखा लेकिन वो उसे कही नज़र नहीं आया।शाम होने वाली थी।खरगोश उधर की तरफ लपका जहाँजा कर रेस ख़त्म होनी थी।
खरगोश जब वहा पंहुचा तो ....कछुआ पहले से वहाँ बैठा मुस्करा रहा था। वो रेस जीत चुका था।
शिक्षा - लगातार कोशिश करने वालो की हमेशा जित होती हैं 

दो मेढ़क.

Two frogs.


एक गाँव था।उसमे एक सुन्दर सा तालाब था।उसमें दो मेंढक रहते थे।वो दोनों दोस्त थे और हमेशा सोचा करते थे क़ि शहर कैसा होता होगा।दोनों की शहर देखने की बड़ी इच्छा थी।

एक दिन दोनोँ निकल पड़े शाहर देखने के लियें।धीरे धीरे चलते हुए वो आगे बड़ रहे थे।अभी कुछ ही दूर गए थे क़ि वो थक गए। एक मेढ़क ने दूसरे से कहा- " मैं तो थक गया।क्या तुम्हें शहर नज़र आ रहा हैं। "
दूसरे मेढ़क ने कहा -" ठहरो तुम्हारी पीठ पर चढ़ कर देखता हूँ।"
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और ऐसा कह कर वो मेढ़क की पीठ पर चढ़ गया।और इधर उधर देखने लगा।लेकिन उसे अपना गाँव ही दिखा शहर का कोई चिन्ह तक नहीं मिला।नीचे वाले मेढ़क ने पूछा-" क्या तुम्हे शहर नज़र आया ?"
ऊपर वाले ने कहा- " हां दिख रहा हैं।"
नीचे वाले मेढ़क ने पूछा -" कैसा दीखता हैं?"
ऊपर वाले मेढ़क ने कहा-" ये तो बिलकुल हमारे गाँव जैसा हैं।"
नीचे वाले मेढ़क ने कहा- " अगर शहर हमारे गाँव जैसा ही हैं तो फिर इसे देखने जाने का क्या फायदा?"
और दोनों मेढ़क गाँव में वापिस आ गए।गाँव में उन्होंने सबको कह दिया क़ि उन्होंने शहर देख लिया हैं।
शिक्षा - बिना प्रयास किये हिम्मत नहीं हारनी चाहिये।वर्ना मंजिल नहीं मिलती।

प्यासा कौआ.

The thirsty crow.


एक था कौआ।दूर आसमान में खाने की तलाश में घूमते घूमते उसे बहुत देर हो गई थी। धूप में उड़ते- उड़ते कौऐ को प्यास लगने लगी।कौऐ ने पानी की तलाश में इधर उधर नज़र दौड़ाई तो उसे एक जगह एक घड़ा पड़ा हुआ दिखाई दिया। कौऐ को बड़ी ख़ुशी हुई।वो घड़े के पास आ गया।
कौऐ ने घड़े में झाँक कर देखा उसमें पानी तो था लेकिन कौऐ की चोंच उस पानी तक नहीं पहुँच रही थी।अब वो अपनी प्यास कैसे बुझाए।
कौए को प्यास भी बहुत ज्यादा लगी थी। कौऐ को एक उपाय सूझा उसने इधर उधर नज़र दौड़ाई तो पास में ही कुछ कंकर-पत्थर पड़े हुए थे।
कौऐ ने एक एक कंकर को अपनी चोंच से उठाया और घड़े में डालने लगा।उसके ऐसा करने से पानी घड़े के तल से ऊपर आने लगा।
कौऐ की मेहनत सफल हुई पानी घड़े के ऊपर तक आ गया और कौऐ ने पानी पी कर अपनी प्यास बुझा ली।
शिक्षा- कोशिशें हमेशा कामयाब होती हैं।

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