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Hindi kahani Dyano ka ghar (seema khanna) hindi kahaniya .

            डायनों का घर (सीमा खन्ना)

 🖍 ये एक अमावस की काली ठंडी रात थी। वो साया धीरे धीरे आगे बड़ रहा था।कभी - कभी आवारा कुत्तों के भौकने से सर्दीला माहौल और ज्यादा डरावना हो रहा था।

उस काले साये ने अपने मफ़लर को कानो पर खींच लिया। रास्ते पर रौशनी ना के बराबर थी।कोई 7 या 8 मिनट चलने के बाद रास्ता दाहिनी तरफ मुड़ गया।रास्ते के साथ साया भी मुड़ गया।कंटीली झाड़ियों वाली एक पगडंडी शुरू हो चुकी थी।
Hindi kahani crime story ki es series mai aap pad rahe hai " डायनों का घर " kahaniya samaj ka darpan hoti hai. samaj mai reti riwaj ke naam par kitna bhayank ho sakta hai.es kahani mai pade.
साये ने अपनी जेब में कुछ टटोला और अपनी रफ़्तार को तेज़ कर दिया।पगडंडी लघ-भाग सूनी थी।सर्दियो में लोग-बाग जल्दी घरो में बंद हो जाते हैं। उसने अपनी गाड़ी गेस्ट-हाऊस में ही छोड़ दी थी।बस अब ज्यादा दूर नहीं जाना था।वो दिन के उजाले में सब कुछ देख गया था।
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अब रास्ता खुलने लगा था। इक्का-दुक्का आबादी थी। पेड़ और जंगली पौधों ने माहौल को और ज्यादा भयानक कर दिया था। ये एक क़स्बा ही था। और सामने था कस्बे का सब से भयानक हिस्सा...

वो ठिठक कर रुक गया। उस खंडहर के टूटे दरवाजे से दो आदमी हाथ में लालटेन लिए उधर ही आ रहे थे। उसने झट से खुद को पौधों के पीछे छुपा लिया। दोनों पास से फुसफुसाते हुए निकल गए।
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उस साये को भी वहीं जाना था। सामने ही था ,डरावना सा लालटेन की पीली धुंधली में डूबा डायनों का घर..हां यहीं नाम था। साया सरकता हुआ डायनों के खंडहर के बीचो बीच जा कर खड़ा हो गया। सामने की मोटी टूटी दीवार पर एक किल्ली पर मरियल रौशनी वाला लालटेन लटक रहा था।तभी दिल दहलाने वाली चीख अँधेरे में गूंजी।साया कॉप गया। पास ही
कहीं कुत्ते एक साथ रोने लगे।

साये ने उस भयानक खंडहर का एक चक्कर लगाया।अंदर से किसी के सिसकने की आवाजे आ रही थी। उसने अंदर का रास्ता खोजने की कोशिश करी।उस टूटे फूटे खंडहर में रत्ती भर भी अंदर झाँकने की जगह नहीं मिली। वो थक कर फिर खंडहर के सामने आ कर खड़ा हो गया। फ़िज़ा में फिर दिल दहला देने वाली चींख गूंजी।साया फिर दीवारो में झिरिया तलाशने लगा।
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फिर अचानक दरवाजा खुलने की चरमराहट सुनाई दी। एक आदमी तेजी से बाहर निकला और उसने वापिस से दरवाजे को बाहर से ताला लगा दिया। फिर खंडहर से बाहर निकल गया। कुछ सोच कर साया भी उसका पीछा करने लगा। आदमी मंदिर के पीछे जा कर गायब हो गया।

वो वापिस गेस्ट-हॉउस वापिस आ गया।वो साया और कोई नहीं एक जाने माने न्यूज़ चैनेल का वरिष्ठ पत्रकार हेमंत राठौर था। जो उस कस्बे में डायनों का घर के नाम से प्रचलित उस खंडहर पर एक न्यूज़ स्टोरी बनाने यहाँ आया था।अब तक वो समझ चुका था क़ि कुछ झोल झाल हैं। हेमन्त काफी थका हुआ महसूस कर रहा था और अब वो सोना चाहता था।जल्दी ही नींद ने उसे अपने आगोश में ले लिया।

दूसरे दिन हेमन्त कस्बे की एक चाय की दुकान पर बैठा चाय पी रहा था।
"बहुत अच्छी चाय है.." उसने तारीफ़ का पासा फेंका। चाय वाला खुश था।
"अच्छा भैया,ये डायनों वाले घर का क्या चक्कर है.. वहां सचमुच  डायने रहती हैं क्या ?" उसने चाय की चुस्की लेते हुए पूछा।

"आप क्यों पूछ रहे हो साहब ?"

" राईटर हूँ.. कहानियांओ की तलाश में रहता हूँ.. काफी चर्चा सुनी है डायनों के घर की, तो सोचा देखें कितना दम है इस कहानी में.."

चाय वाला कुछ बोलता इस से पहले ही सामने से एक जलूस आता नज़र आया।काफी भीड़ थी।एक दुल्हन बानी औरत को दो आदमियों ने कस कर पकड़ा हुआ था और घसीट कर कही ले जा रहे थे।औरत जोर जोर से रोती बिलखती जा रही थी। जैसे वो जाना ही नहीं चाह रही हो।अजीब सा जलूस था।जल्दी ही जलूस उनके पास से निकल गया।

"लो साहब देख लो डायन..." चाय वाला धीरे से फुसफुसाते हुये बोला।

"मतलब ?" वो चोंक गया।

" साल भर भी नहीं हुआ इस औरत की शादी को और पति मर गया। गाँव के लोगो के मुताबिक अब ये डायन है।अब ये डायन घर में ही रहेगी। "
चायवाला और भी बहुत कुछ बोल रहा था।लेकिन हेमंत सकते की हालत में था।इतना भयानक शोषण ?
हेमंत तुरंत भीड़ के पीछे चल पड़ा।

औरत को डायन घर में जबरदस्ती अंदर धकेल कर ताला लगा दिया गया।
लोग आपस में कुछ शुद्धि की बाते करते हुये वापिस हो गए।

हेमंत को इस केस की जड़ तक जाना था।लेकिन बिना सबूत के कुछ नहीं होता। हेमंत समझ गया था क़ि अगर इतना कुछ हो रहा है तो कोई बड़ा स्कैंडल है।

हेमंत शाम का इंतजार करने लगा।सर्दियो में अँधेरा जल्दी हो जाता है। हेमंत पेड़ के रास्ते से खंडहर की छत पर पहुँच गया।टूटे हुए रास्ते से होता हुआ हेमंत एक कमरे के सामने पंहुचा।औरतो के सिसकने की आवाजें साफ सुनाई दे रही थी। दरवाजे पर ताला लगा था। पास में एक खिड़की थी।उसने खिड़की को खटखटाया, रोने की आवाजे बंद हो गई। उसने फिर खटखटाया। किसी ने खिड़की खोल दी।सामने एक बिखरे बालो वाली लड़की खड़ी थी।उम्र कोई 25,26 साल होगी।ये वो औरत नहीं थी।जिसे आज लाया गया था।

"कौन हो आप ? घबराओ मत ..मै तुम्हारी मदत करूँगा " उसने कहा।
 "चले जाओ वर्ना मार देंगें तुम्हे " वो औरत खड़की बंद कर के पीछे हट गई।लेकिन तुरंत खिड़की फिर खुली।

"मेरी मदत करो..मेरे माँ बाबा को खबर कर दो...यहाँ की पुलिस के पास मत जाना..जल्दी नंबर लो.." वो दिन वाली औरत थी जो एक ही साँस में सब बोल गई। हेमन्त ने उस से धीरे धीरे सब कुछ बातें करी और उसी रास्ते से वापिस आ गया जिस से अंदर गया था।

आज पूर्णमासी की रात थी। रात के 12 बजने वाले थे।ठंडी रातें बड़ी डरावनी होती हैं।ये रात कुछ ज्यादा डरावनी थी। कही दूर कुत्ते की रोने की आवाज माहौल में कंपकपी पैदा कर रही थी।

एक आदमी ने खंडहर के अहाते में कदम रखा। पहनावे से वो कोई पुजारी लग रहा था।उसने कुर्ते की जेब से चाबी निकाल कर ताला खोला और अंदर चला गया। इस गलियारे से होता हुआ वो  उस कमरे में पंहुचा जहां तीन औरते उस नई औरत को घेर कर बैठी हुई थी।तीनो घबराई हुई लग रही थी।

उस आदमी ने कमरे में कदम रखा तो वो दोनों औरते दरवाजे से बाहर निकल गई।पीछे वो नई लाई गई औरत भी लपकी लेकिन उस पुजारी ने उसे वापिस कमरे में धक्का दे कर दरवाजा बंद कर दिया।

"छोड़ दो मुझे .." औरत चिल्लाई और रोने लगी।
वो हँसते हुए उसके पास आया।

"चिल्ला.. और चिल्ला,कोई नहीं आएगा इस डायनों वाले घर में.." उसने औरत के बाल पकड़ लियें। बेशर्मी के साथ हँसने लगा।

"देख मेरा कहा मानेगी तो जल्दी ही यहाँ से निकाल देंगे तुझे...राज करेगी, वर्ना पूरी उम्र डायन बन कर यहीं गुजारनी होगी...इस गाँव में किसी की हिम्मत नहीं जो हमारे खिलाफ जा सकें.. पुलिस भी नहीं..समझी."

पुजारी ने उसे ज़मीन पर बिछे बिस्तर पर धक्का दे दिया और औरत के साथ जबरदस्ती करने लगा।तभी कमरे के कोने से एक औरत निकल कर आयी और उसने लपक कर दरवाजा खोल दिया। धड़धड़ाते हुए सादी वर्दी धारी पुलिस अंदर आ गई।पुजारी की हरकतों को कैमरे में कैद कर लिया गया था।

पुजारी रंगे हाथो पकड़ा गया था।एक बहुत बड़े रेकेट का पर्दा फ़ाश हो गया था।इन जवान औरतो को दूसरे देशो में बेचा जाता था। पुजारी के पीछे बहुत सारे बड़े लोगो का इन सब में हाथ था। इस लिए हेमंत ने  हाई अथॉरटी से मदत मांगी थी।सभी दोषियों को गिरफ्तार कर लिया गया था और डायनों के घर को खाली कर के उस पर सरकारी ताला लगा दिया गया था।अब डायनों का घर चैन की साँस ले रहा था।

Disclaimer -- यह कहानी सुने सुनाये किस्को पर आधरित है।किसी व्यक्ति विशेष से इस कहानी का मेल होना महज इत्तफ़ाक होगा।website इसकी ज़िम्मेवारी नहीं लेती।
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